धन्यवाद सभापति जी!
यह वक्तव्य हम सभी ................... की ओर से प्रस्तुत कर रहे हैं।
वियना घोषणापत्र में जवाबदेही को मानवाधिकार व्यवस्थाओं के एक मूल आधार के रूप में विशिष्ट रूप से बताया गया है; और इसी कारण से आज तक अनेक एक्टिविस्ट/कार्यकर्ता इसके साथ जुड़ाव बनाते आए हैं। लेकिन फिर भी, इसको लागू करने और जवाबदेही तंत्र की मौजूदा कमियों, और मानवाधिकार उल्लंघनों में इसकी सहभागिता को अब और नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
आज अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षित गर्भसमापन दिवस के अवसर पर हम सत्ता व्यवस्थाओं का विश्लेषण करने के लिए, बहुस्तरीय भेदभाव और भेदभाव और दमन के मूल कारणों, और सबसे अधिक हाशियाग्रस्त समूहों/व्यक्तियों को केन्द्र में लाने की बात करने के लिए प्रजनन न्याय के कुछ मूलभूत सिद्धाँतों को फिर से दोहराते हैं1 । ग़ाज़ा में इज़राइल द्वारा बिना किसी डर के किए जा रहे नरसंहार और सूडान, डीआरसी में किए जा रहे व्यापक अत्याचारों पर अनेक पश्चिमी देशों की चुप्पी और उनकी इसमें भागीदारी, वैश्विक स्तर पर बहुप्रणाली व्यवस्था की ओर से जवाबदेही लेने में एक सामूहिक विफ़लता है। हम ग़ाज़ा में प्रजनन नरसंहार2 को समाप्त करने की फ़िलिस्तीन नारीवादी समूहों की मांग और यौनिक हिंसा अपराधों पर ध्यान ना देते हुए उन्हें बनाए रखने वाली संस्कृति3 को समाप्त करने की नारीवादी मांग का समर्थन करते हैं।
इस तरह के तमाम आँकड़े उपलब्ध हैं और हम सभी इनके बारे में जानते हैं कि पूर्वी जेरुसलम और इज़राइल सहित अधिकृत फ़िलिस्तीन क्षेत्रों पर स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय जाँच आयोग द्वारा पाया गया कि इज़राइल ने अन्य गंभीर मामलों के साथ प्रजनन स्वास्थ्य सेवा सुविधाओं को लक्षित किया है , भुखमरी ओर मासिक धर्म से जुड़ी हानि को माध्यम बनाते हुए प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को प्रतिबंधित किया, और साथ ही अपने प्रजनन नरसंहार के अभियान में फ़िलिस्तीनियों को मारने और उनको अपंग बनाने के अलावा यौनिक और प्रजनन हिंसा के भयावह कृत्यों को अंजाम दिया है। बड़ी संख्या में स्वतःगर्भसमापन (मिसकैरिज), इमरजेंसी सी-सेक्शन और हिस्ट्रिक्टमी के मामले सामने आए हैं जो मातृत्व और शिशु मृत्यु दर में हुई गंभीर वृद्धि को दिखाते हैं।
जबकि सूडान में सितम्बर 2024 तक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं पर हमलों के 100 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और जनवरी 2025 में उत्तरी दारफ़ूर की राजधानी अल-फ़शेर शहर में एकमात्र बचे अस्पताल पर आरएसएफ़ मिलिशिया द्वारा हमला किया गया। मार्च 2025 तक सूडान के संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में दो तिहाई अस्पताल संसाधनों/आपूर्ती की कमी, असुरक्षा और बमबारी के कारण काम करना बंद कर चुके हैं। लड़ाई की शुरुआत से ही महिलायें और लड़कियाँ अत्यधिक रूप से यौनिक हिंसा का सामना कर रही हैं और अनेक रिपोर्टों में कई जगहों पर यौनिक दासता, जबरन यौनकर्म और यहाँ तक की सामूहिक गुमशुदगी के मामलों के बारे में पता चला है। यौनिक हिंसा के मामलों में बहुत कम महिलाओं को चिकित्सीय सहयोग मिल पाता है, हम जानते हैं कि अल-जज़ीरा जैसे क्षेत्रों में कुछ मामलों में बलात्कार से संघर्षशीलों की गर्भसमापन सेवाओं तक पहुँच बन पाई, लेकनि फिर भी यह एक अपवाद है और सभी की पहुँच में या सभी के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। संघर्ष प्रभावित अनेक क्षेत्रों में महिलाओं और लड़कियों को जबरन अपनी इच्छा के विरुद्ध अपनी गर्भावस्था को जारी रखना पड़ रहा है और पुलिस थानों और अदालतों द्वारा संस्थानों और सेवा केन्द्रों के अभाव के कारण उन्हें ऐसे अस्पतालों में जाने के लिए दस्तावेज़ बना कर दिए जाते हैं जो अधिकतर अब काम नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण वे अक्सर असुरक्षित गर्भसमापन और जीवन को ख़तरे में डालने वाली जटिलताओं का जोखिम उठाती हैं। इसलिए हम त्वरित रूप से सूडान में बलात्कार के मामलों में संघर्षशीलों के लिए एक सुरक्षित, क़ानूनी और समाज के डर के बिना गर्भसमापन को सुनिश्चित कराने वाले जेण्डर न्यायपूर्ण उपायों की मांग करने के साथ, वहाँ जीवन रक्षक ज़रूरी प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच के लिए मानवीय हस्तक्षेप की मांग करते हैं, जिन क्षेत्रों में लड़ाई चल रही है वहाँ पर भी।
इस सबके बावजूद मानवाधिकार काउन्सिल में हम अभी भी कुछ पश्चिमी देशों को इन उल्लंघनों में अपनी भागीदारी को छिपाते देख रहे हैं, जेण्डर न्याय और यौनिक प्रजनन व स्वास्थ्य अधिकारों (एसआरएचआर) के अपने तथाकथित समर्थन का हवाला देते हुए वे अंतर्राष्ट्रीय क़ानून का सम्मान और उसका पालन करने के दोहरे मानदण्ड की ज़िम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं और नरसंहार की भाषा पर तर्क-वितर्क के दौरान जवाबदेही से बचने के लिए एसआरएचआर की भाषा के सहारा लेते हैं। औपनिवेशकारी नस्लीय शासन का अंत किए बिना और वर्तमान उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित किये बिना मानवाधिकारों की बात सभी के लिए समान रूप से नहीं हो सकती। एक्टिविस्ट/कार्यकर्ता, मानवाधिकार संरक्षक और अन्य सभी इस पर कार्यवाही की मांग कर रहे हैं। हम सभी देशों से यह मांग करते हैं कि वे अपने मानवाधिकार और मानवीय क़ानूनी उत्तरदायित्वों के तहत तुरंत कार्यवाई करें, विशषरूप से नागरिकों की सुरक्षा के लिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।